Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 52, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 52 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
कुत एषा कथं चेति विकल्पाननुदाहरन् ।
नेदमेषां न चास्तीति स्वयं ज्ञास्यसि बोधतः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, यह अविद्यानामक भ्रान्ति कैसी
है ओर कहाँ से आयी-इस तरह के विकल्प न करते हुए आप मेरे इस उपदेश को सुनिये । फिर तो
पीछे ज्ञान हो जाने से आप स्वयं जान जायेंगे कि न तो यह जगत् है और न यह अविद्या ही है