Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 50, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 50, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
तेषां चिरतया स्वप्नः स जाग्रत्त्वमुपागतः ।
स्वप्नजागरकास्ते तु जीवास्ते तद्गताः स्थिताः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
दीर्घकाल के प्रभाव से जब उनका
स्वप्न जाग्रत्-रूप बन जाता है, तब उनके स्वप्न के वे जीव स्वप्न जाग्रत् कहे जाते हैं, वास्तव में
वे उन्हीके स्वप्न में ही स्थित हैं