Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 50, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 50, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 50 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
संकल्पोपशमे भूयस्तमन्यं वा श्रयन्ति ते ।
देहे तेषां वयमिमे संकल्पपुरुषाः स्थिताः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
वे संकल्प का विनाश हो जाने
पर फिर पूर्व के व्यवहार को उससे विलक्षण बनाकर करने लग जाते हैं । उनकी दृष्टि सेये हम
उन्हीं के शरीर में संकल्पपुरुष ही स्थित हँ, क्योकि समानसंकल्प से उत्पन्न हैं