Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
त्रयमेतत्तु यावस्थात्रयेणानेन वर्जिता ।
पश्यन्तीवाप्यपश्यन्ती सावस्था परमोच्यते ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जाग्रत्,
स्वप्न ओर सुषुप्ति ये जो तीन अवस्थाएँ है ये तो सभी को भलीभाँति ज्ञात है । परन्तु इन तीनों से
शून्य जो चौथी अवस्था है वह तो दर्शन आदि व्यवहारं के मूल का बाध हो जाने पर सांसारिक
पदार्थो को न देखती हुई भी एकमात्र जीवन के हेतुभूत प्रारब्ध के शेष रह जाने से देखती हुई-सी
अन्य की दृष्टि में अवभासती है । तत््वज्ञानियों की दृष्टि में तो वह परमावस्था ही कहलाती है