Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verses 35–36
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, verses 35–36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
अज्ञानोन्मत्तता पुंसां यथाभ्यासेन भाविता ।
तथैव बोधात्स्वभ्यासात्सा कालेनोपशाम्यति ॥ ३५ ॥
आतिवाहिकदेहोऽयमाधिभौतिकतां यथा ।
नीयते भावनां तज्ज्ञैर्बोधसत्ताप्रसादतः ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
पुरुषों के अभ्यास से अज्ञानप्रयुक्त
उन्मत्तता जैसे उत्पन्न हुई रहती है वैसे ही ज्ञान हो जाने पर अपने उस ज्ञान के अभ्यास से धीरे-
धीरे समय पाकर वह नष्ट भी हो जाती है