Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 33
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, verse 33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
भ्रान्तेः स्वयं परिज्ञानाद्वासना विनिवर्तते ।
स्वप्ने स्वप्नतया बुद्धे कस्य स्यात्किल भावना ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
भ्रान्ति का परिज्ञान होने से वासना स्वयं निवृत्त हो जाती है । ठीक ही है, स्वप्न का स्वप्नरूप से
ज्ञान हो जाने पर भला किस पुरुष को स्वाप्निक पदार्थों में सत्यत्व की वासना हो सकती है ?