Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 48, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 48 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
ददात्येतन्महाबुद्धे निर्वाणं परमेश्वरः ।
अहर्निशं परमया चिरं भक्त्या प्रसादितः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
हे महाबुद्धे, रात-दिन की उत्तम भक्ति से चिरकाल के बाद प्रसन्न किया गया परमात्मा वर्णित
परमपदरूप निर्वाण देता है, दूसरा नहीं | तप के प्रभाव से यह ईश्वर के प्रसाद से मोक्ष मिलता है,
ऐसी श्रुति की उक्ति भी है