Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
सत्प्रज्ञोन्नतिमायाति शास्त्रार्थरसशालिनी ।
विवेकिनि विलासेन कदलीव महावने ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
विवेक से पूर्ण हृदय में शास्त्रार्थरस से पूर्ण होकर
उत्तम प्रज्ञा ऐसे बढ़ने लग जाती है, जैसे महावन में मूलप्ररोहादि के विस्तार से कदली बढ़ने लग
जाती है