Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
निर्वाणमामीत निरस्तखेदं समस्तशङ्कास्तमयाभिरामम् ।
सुषुप्तसौम्यं समशान्तचित्तं शरद्धनाभोगविशुद्धमन्तः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
यह सव होने पर भी समाधि की ओर प्रधान लक्ष्य रखना चाहिए, इस आशय से उपसहार
करते हैं /
हे श्रीरामजी, अपने भीतर एकमात्र निर्वाणरूप समाधि की ओर लक्ष्य रख करके स्थित रहना
चाहिए, किसी प्रकार का खेद नहीं करना चाहिए, सारी शंकाओं को तिलांजलि दे देनी चाहिए ।
यही समाधि अतिरमणीय, सुषुप्ति के सदृश परमशान्त, शरत्कालीन विस्तृत बादलों के सदृश
निर्मल है । इसी अवस्था में चित्त एकरूप ओर प्रशान्त रहता है