Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
स तादृग्रूपतामेत्य परमार्थफलस्य तत् ।
क्रमान्निकटमाप्नोति खगोऽगपदवीमिव ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
वह ज्ञानी पुरुष उस तरह के स्वरूप में पहुँचकर क्रमशः
मोक्षरूप परमार्थफल के निकट ऐसे प्राप्त हो जाता है, जैसे सिद्धयोगी मेरु के शिखर पर