Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 45, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 45 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
एतावताथ कालेन स विवेकद्रुमः फलम् ।
अन्तस्थं परमार्थात्म शनैः प्रकटयत्यलम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्तर कुछ समय के बाद वह विवेकपूर्णं ध्यानवृक्ष पाँच कोशो के भीतर
स्थित पारमार्थिक आत्मस्वरूपभूत मोक्षफल को धीरे-धीरे पूर्णरूप से प्रकट करता है यानी
प्रत्यक्ष कराता है