Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 43, Verse 64
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 43, verse 64 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 64
संस्कृत श्लोक
एकमेव तथा ज्ञानं ज्ञेयान्तं भात्यखण्डितम् ।
शून्यत्वादेकममलं यथा सर्वगमेव खम् ॥ ६४ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञान की निर्मलता में भी यही द्ष्टान्त है, यह कहते है /
जैसे सर्वत्र विद्यमान एक आकाश शून्यरूप होने से निर्मल है, वैसे ज्ञान-ज्ञेयदशा में भी
विद्यमान ब्रह्म निर्मल है, यह जानकर स्थित रहिये