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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 43, Verse 60

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 43, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 60

संस्कृत श्लोक

निर्वाणादितरा सत्ता दुःखायाहमिति भ्रमः । मृगतृष्णाम्बुरूपोऽहमसच्छून्यस्वरूपकः ॥ ६० ॥

हिन्दी अर्थ

तब निवाणि से भिन्न अहय्‌” यह भरमरूय सत्ता किस उपाय से शान्त होती ह वह उपाय बतलाते हैं / मृगतृष्णाजल के सदृश इस अहंकार का रूप असत्‌ और शून्य ही है, इस तरह के आत्मा के परिज्ञान से यह अहंकार बिलकुल शान्त हो जाता है