Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
ज्ञानज्ञेयज्ञप्तिमुक्तं दृषन्मौनमिव स्थितम् ।
शान्तान्तःकरणाः स्वस्थाः शिलापुत्रककोशवत् ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
आप सक लोगों को वह शिवस्वरूप स्थिति ही प्राप्त करनी चाहिये, यह कहते हैं /
इसलिए आप लोग जैसे पाषाण-प्रतिमाएँ शान्त रहती हैं, वैसे ही अपने अन्तःकरण को
शान्त बनाकर स्वस्थ होइए एवं सांसारिक सब व्यवहारों को करते तथा कराते हुए भी ज्ञानी
के रूप में ही स्थित रहिये