Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
सद्योमोक्षफलः साधो स्वात्मैव परमेश्वरः ।
सत्यालोकनमात्रैकपूजितोऽनुत्तमार्थदः ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
केवल यथार्थ अवलोकनरूप
अकेली पूजन सामग्री से जिसकी पूजा की गई हो, ऐसा सर्वोत्तम फल प्रदान करनेवाला यह
ईश्वररूप आत्मा जहाँ उपस्थित हो, वहाँ भला ऐसा कौन मूर्ख होगा, जो किसी दूसरे का
(अनात्श्रुत तटस्थ इश्वर का (4)) आश्रय करेगा ?