Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
बोधाय पूज्यतां बुद्ध्या स्वभावः परमेश्वरः ।
विवेकपूजितः स्वात्मा सद्यः स्फारवरप्रदः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
विवेक से पूजित स्वात्मभूत
परमात्मा तुरत ही पूजा करनेवाले को निरतिशय आनन्दरूप प्रदान करता है । इस पूजा में
रुद्र, उपेन्द्र आदि की पूजा तो, जीर्ण-शीर्ण तिनके के टुकड़े के सदृश, हलकी पड़ जाती
है