Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
विश्वाभासं तदेवेदं न विश्वं सन्न विश्वता ।
देशकालादिमत्त्वेन कदाचिद्धेम्नि सत्यता ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
अथवा ब्ल्यद्ृष्टि से असत्य भी विश्व की उम्रके कार्यश्रूत छोटे-छोटे देश काल की अपेक्षा
बड़े-बड़े देश-काल के सम्बन्ध से सत्ता हैं, इस आशंका का परिहार करते हैं /
कोई लोग कहते हैं कि कार्यरूप से भिन्न कटकरूप की अपेक्षा अधिक देश काल के सम्बन्ध
से सुवर्ण में जैसे कादाचित्क (कभी होनेवाली) सत्यता है, वैसे ही कार्य की अपेक्षा अधिक देशकाल
के सम्बन्ध से विश्व में भी सत्यता हो सकती है