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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

तत्कस्यचिच्छिवं शान्तं कस्यचिद्ब्रह्म शाश्वतम् । कस्यचिच्छून्यतामात्रं कस्यचिज्ज्ञप्तिमात्रकम् ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

उक्त स्वरूप के विषय में वेदों का अनुसरण करनेवाले और न करनेवाले विचारशील वादियों की यथार्थ ओर अयथार्थकूपो स्रे अनेक कल्पनाएँ हैं; यह कहते हैं / वह किसी के मत में शान्त शिव, किसी के मत में शाश्वत ब्रह्म, किसी के मत में शून्यतारूप ओर किसी के मत में वह ज्ञानरूप है