Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 41, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 41, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 41 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
कान्ते कान्तं प्रकचति पूर्णे पूर्णं व्यवस्थितम् ।
द्वित्वैक्यरहिते भाति द्वित्वैक्यपरिवर्जितम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
उस अवस्था में ज्ञानी को प्रकाशमान वस्तु
में स्थित प्रकाशमान वस्तु ही पूर्ण में स्थित पूर्ण वस्तु ही तथा द्वित्व ओर एकत्व से रहित (शोधित)
प्रत्यगात्मा में द्वित्व-एकत्व रहित (शोधित) ब्रह्मरूप वस्तु ही अखण्ड एकरसरूप से ही भासित
होती है