Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 40, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 40, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 40 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
नात्मानमवगच्छामि न दृश्यं च जगद्भ्रमम् ।
ब्रह्म शान्तं प्रविष्टोऽस्मि ब्रह्मैवास्मि निरामयः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, मैं अपने को यानी द्रष्टा आदि त्रिपुटी के भीतर सर्वप्रथम वसिष्ठसंज्ञक
जीव को नहीं जानता और न दृश्य तथा इस जगत्के भ्रम को ही जानता हू मैं शान्त ब्रह्म
में प्रविष्ट हो चुका हूँ । हे श्रीरामजी, मैं निर्विकार ब्रह्म ही हूँ ॥