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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 40, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 40, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 40 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

भोगा भवमहारोगा बन्धवो दृढबन्धनम् । अनर्थायार्थसंपत्तिरात्मनात्मनि शाम्यताम् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

यही कारण है कि ब्रह्मस्वरूप में विश्रान्ति के विरोधी भोग आदि सबके सब अनर्थरप ही हैं; यह कहते हैं। हे श्रीरामचन्द्रजी, ये जितने भोग हैं वे सबके सब संसाररूप महारोग है, बन्धु लोग दृढ़ बन्धन हैं तथा यह सारी अर्थसम्पत्ति तो महान्‌ अनर्थ की कारण है । इसलिए अपने-ही से अपनी आत्मा में शान्ति लीजिये