Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 4 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
अहविदनहंवित्त्वादेव शाम्यत्यविघ्नतः ।
एतावन्मात्रसाध्येयं किमिवेयं कदर्थना ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
अहुद्धि को नष्ट करने में बिलकुल सरल उपाय बतलाते हैं /
अहंकार की भावना करनेवाला जीव एकमात्र अहंकार की भावना न करने से ही बिना किसी
विघ्न के (७) शान्त हो जाता है। और यह मुक्ति सिर्फ इतने ही साधन से सिद्ध हो जाती है, इसके
लिए अनेक साधनों के सम्पादन मेँ व्यर्थ क्लेश क्यों किया जाय ?