Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 4 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
साद्र्यब्ध्युर्वीनदी सेयं रूपालोकैषणादिका ।
अहमर्थस्य मरिचबीजस्यान्तश्चमत्कृतिः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीका विस्तृतरूप से वर्णन करते हैं ।
इस अहमर्थरूपी मिर्च के बीज के भीतर पर्वतों, समुद्रों, पृथिवी और नदियों के सहित तथा
बाह्य इन्द्रियों से होनेवाले पदार्थों के पर्यालोचन एवं मन के भीतर रहनेवाली काम-संकल्प
आविवृत्तिरूप एषणारूपी चमत्कृति उदित होती है