Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 4 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
बाष्पेणेवाहमर्थेन निःसारेणापि सारवत् ।
व्यामलः परमादर्शस्तच्छान्तौ संप्रसीदति ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
निःसार भी मुख के वाष्प से जैसे परम स्वच्छ दर्पण मलिन हुआ प्रतीत होता है वैसे ही
परमात्मारूपी दर्पण अहंकाररूपी निःसार भी मुखवाष्प से सारवत् मलिन हुआ प्रतीत होता है ।
अहंकाररूप निःसार बाष्प के शान्त होने पर तो परमात्मा निर्मल हो जाता है