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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, Verse 27

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 4 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

शस्त्राघाताः प्रसह्यन्ते सह्यन्ते व्याधिवेदनाः । नाहमित्येवमात्रस्य सहने का कदर्थना ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

अनल्भावना असह्य है. इसका खण्डन करते हैं / जब शस्त्रो के आघात सहे जाते हैं, जब व्याधियों की पीड़ाएँ सही जाती है तब ' मैं नहीं हूँ इतनी भावना को सहने में कौन-सा क्लेश हो रहा है ?