Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 39, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 39 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

असद्रूपोपलम्भानामियं वस्तुस्वभावता । यत्स्वर्गवेदनं स्वप्नवन्ध्यापुत्रोपलम्भवत् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

(तत्वज्ञ संकल्य नहीं जानता“ इस एवोक्त अंश का स्पष्टीकरण करके अब तेनासदेव सः“ ङस बचे अंश का स्पष्टीकरण करने के लिए अद्वस्त की प्राप्ति का स्वरूप बतलाते हैं । प्रत्येक पुरुष में जो सद्रूप वस्तु के अज्ञान हैं, उनके स्वभाव का वास्तविक स्वरूप स्वप्नज्ञान और वन्ध्यापुत्रज्ञान की तरह असत्‌ सृष्टि के ज्ञान को उत्पन्न कर देना ही है