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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

तस्मै सर्वं ततः सर्वं तत्सर्वं सर्वतश्च तत् । तच्च सर्वमयं नित्यं तस्मै सर्वात्मने नमः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

यों समस्त क्रियाकरारक फ़लरूप बल्यीयूत जगत्‌ को ही प्रणाम करते हैं । यह सब कुछ ब्रह्म के लिए ही है, उसीसे सब कुछ उत्पन्न हुआ है । वही सर्वरूप है, वही चारों ओर व्याप्त होता है, वही सबमें ओत-प्रोत है, नित्य भी वही है, ऐसे सर्वात्मक ब्रह्म को नमस्कार है