Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 41
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, verse 41 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
गतेच्छमननं शान्तमनन्तस्थमभावनम् ।
व्यवहारोऽस्तु ते मा वा स्पन्दास्पन्दैर्यथानिलः ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामभद्र, जिस तरह पवन का स्पन्दन और अस्पन्दन के द्वारा व्यवहार या अव्यवहार होता
है, उसी तरह आपका भी इच्छा-मनन से रहित, शान्त, अनन्त ब्रह्म मेँ स्थित तथा भावनारहित
ही व्यवहार हो यान हो