Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत् ।
यत्तपस्यसि हंस्येषि तत्सर्वं शिवमव्ययम् ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त आचरण का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हैं /
जो कुछ आप कर्म करते हैं, जो कुछ भक्षण करते हैं, जो कुछ हवन करते हैं, जो दान
देते हैं, जो तप करते हैं और जो हनन-गमन करते हैं, उन सबको आप अविनाशी शिवरूप
ही समझिये