Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
दृश्याद्यो विरतिं यात आत्मारामः शमं गतः ।
स सन्नेवासदाभासः परितीर्णभवार्णवः ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
तत््वज्ञानी परीक्षक के उपस्थित रहते आप कैसे कहते हैं कि परीक्षक नहीं रहते 2 उस्र
पर कहते हैं /
जो शान्त आत्माराम सम्पूर्ण दृश्यप्रपंच से वैराग्य को प्राप्त होकर उपशम को प्राप्त हो गया है,
संसारसागर से पार हुआ वह ब्रह्मभाव से विद्यमान भी देह इन्द्रिय आदि से युक्त परीक्षकरूप से
असत् के ही (अविद्यमान के ही) समान भासता है