Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
अनहंतात्मनो ज्ञस्य सत एकत्वमासतः ।
जरत्तृणलवायन्ते ननु नामाऽणिमादयः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि परम सूक्ष्म ब्रह्म है और बह्यभाव में स्थिति ही मोक्ष है, तो अणिमा आदि प्रिद्धियों के
सदश ही मोक्ष हुआ, इस शंका पर कहते हैं ।
अहन्ता आदि प्रतिबन्धकं के दूर हो जाने पर आविर्भूत हुए निरतिशयानन्दरूप, एक
स्वभावापन्न, सत् ज्ञानी की दृष्टि मेँ ये सब अणिमा आदि सिद्धियाँ जीर्ण-शीर्ण तृण के टुकड़े
के सदृश भासती हैँ