Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 69
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, verse 69 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 69
संस्कृत श्लोक
व्योमभित्तौ जगच्चित्रं चिद्रङ्गमयमाततम् ।
नोदेति नास्तमायाति न शाम्यति न ताम्यति ॥ ६९ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदाकाशरूप दीवार में
जगद्रूपी महान् चित्र चितिरूपी रंग से ही व्याप्त है। न तो यह चित्र उदय को प्राप्त होता है, अस्त
को प्राप्त होता है, न तो शान्त होता है और न मलिनता को ही प्राप्त होता है