Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 49

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

इहेच्छानिच्छते ज्ञस्य शाम्यतां यदलं समे । तथापि श्रेयसे मन्ये नन्वनिच्छोदयं स्फुटम् ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामभद्र, यद्यपि तत्वबोध के बल से ही भलीभोति शान्त हो रहे विषयों की इच्छा या अनिच्छा दोनों तत्त्वज्ञानी के लिए समान हैं यानी दोनों का फल समान है, तथापि अनिच्छा का उदय ही विक्षेपशून्य सुखाभिव्यक्ति का हेतु होने से कल्याणकारक है, यह मेरा मन्तव्य है