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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

तस्या विद्योपशान्तेयं निर्मला मुक्ततोदिता । अशेषदृश्यवैरस्याद्यस्येच्छोदेति न क्वचित् ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

मूल का उच्छेद होने से भी तत्ववेत्ताओं की इच्छा के उदय का संभव नहीं है, इस आशिग्राय से कहते हैं। सम्पूर्ण दृश्य पदार्थों में वैराग्य आ जाने से जिस पुरुष की इच्छा कहीं उदित नहीं होती, उसकी यह सांसारिक अविद्या शान्त हो गयी ओर निर्मल मुक्ति उदित हो गयी