Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
अरूपालोकमननं शिलापुत्रकसैन्यवत् ।
रूपालोकमनस्कारा भान्ति केवात्र विश्वता ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
पत्थर में खुदी गई चित्रगत सेना की नाई यह सारा विश्व बाह्य आन्तर विषय से रहित है ।
अतः विद्वानों की दृष्टि से यहाँ विश्वता कैसी ? परन्तु अज्ञानियों की दृष्टि से तो यहाँ
रूपालोक, मनन आदि सब कुछ भासते ही हैं