Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
इच्छा चिकित्स्यते व्याधिर्न स्वयत्नौषधेन चेत् ।
तदत्र बलवन्मन्ये विद्यते नौषधान्तरम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
उसकी चिकित्सा के लिए धैर्यक्रपी पुरुष प्रयत्न ही एकमात्र ओषध है और दूसरा कुछ नहीं; यह
कहते हैं ।
यदि अपने पौरुष प्रयत्नरूपी ओषध से धैर्यपूर्वक इच्छारूपी व्याधि की चिकित्सा न की जा
सकती, तो यह मैं अच्छी तरह समझता हूँ कि व्याधि से छुटकारा पाने के लिए दूसरा कोई भी उत्तम
ओषध इस संसार में विद्यमान नहीं है