Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
इति चेद्विरसत्वेन बोधयित्वा चिकित्सिताः ।
न भोगरोगास्तद्वच्च शान्त्यै नास्ति कथैव च ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
इस रीति से न कहे गये भी कर्मेन्द्रियों से प्राप्त विषयों में
पहले की नाई निःसाररूप से मन को बोधित करके भोगरूपी रोगों की यदि चिकित्सा न की गई, तो
फिर दुःख-निवृत्ति की कथा ही क्या है ? बल्कि अनर्थ परम्परा की उत्पत्ति होती ही रहेगी