Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
दृश्यन्तां रूपजालानि पुनः प्राप्तान्यवासनम् ।
अरसं निर्मनोमानमगर्वं चित्रनेत्रवत् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
पुनः हे श्रोताओं, आप लोग इच्छारहित, वासनाओं से शून्य तथा अभिमान से रहित
हो, वासनाशून्य चित्रगत नेत्र के सदृश, प्राप्त रूपसमूहों का अवलोकन करते रहें