Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
उच्यन्तां शब्दजालानि वंशवद्गतवासनम् ।
रसेनानङ्गलग्नेन प्रकृतानन्यचोदनैः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रस्तुत प्रारब्धशेषक्षय के अनुपयोगी शब्दों के उच्चारण से रहित,
व्यवहारों में तथा उन व्यवहारों के अंगभूत देहादि मेँ अहन्ता, ममता के सम्बन्ध से रहित, माधुर्यरस
से परिपूर्ण, बाँसुरी की ध्वनि के समान, वासनात्यागपूर्वक आप लोग वाणी से शब्दों का उच्चारण
करते रहें