Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 35, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 35 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
निर्मायमपि मायांशुमण्डलामलभास्करम् ।
ब्रह्म विद्धि विदांनाथमपामिव महोदधिम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
मायारहित होने पर भी जो मायारूपी किरणसमूह का निर्मल सूर्य है । जलों के स्वामी
सागर की नाई वेदनमात्रस्वरूप होने पर भी जो सम्पूर्ण वेदनों का मानों स्वामी है सर्वज्ञ है । हे
श्रीरामजी, उसी को आप ब्रह्म जानिये