Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 34
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, verse 34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
द्रष्टा न दृश्यतां याति चितिर्नायाति चेत्यताम् ।
चेत्याभावादजगति कः किं चेतयते कथम् ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
तत्वज्ञान की दढता होने पर जड़ अर्थ चेतनरूप ही नहीं होते, यह कहते हैं /
द्रष्टा कभी दृश्य रूप नहीं होता और चितिशक्ति चेत्यरूप नहीं होती चेत्य के अभाव से
जगत्-शून्य ब्रह्म मेँ कौन, क्या और किस प्रकार चेतित (प्रकाशित) होगा ?