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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 32

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

अशेषेष्वविशेषेषु शान्ताशेषविशेषता । सत्या सैवाहमित्याशु त्यक्त्वा मोक्षाय भाव्यताम् ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

हे भद्र, चैतन्य से अतिरिक्त किसी भी अन्य स्वरूप का निरूपण न हो सकने से सभी पदार्थ जब एकरूप ही सिद्ध हुए, तब विशेष विभ्रम को छोड़कर उक्त परमार्थ सत्यस्वरूप चितिशक्ति ही मैं हूँ, ऐसी मोक्ष के लिए तत्काल ही भावना करनी चाहिए