Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
अचेतनं चेतनं च स्पन्दास्पन्दवदात्मनः ।
स्वायत्ते न कदर्थस्थे स्वस्थपाषाणवत्स्थिते ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा भले ही हो, इससे हुआ क्या इस पर कहते हैं /
आत्मा का चेतनत्व और अचेतनत्व स्वाधीन है, इसमें किसी यत्न की आवश्यकता नहीं है,
जैसे अपने स्वरूप में स्थित स्फटिक पत्थर के सैकड़ों बिम्ब-प्रतिबिम्बरूप स्पन्दन और अस्पन्दन
स्वाधीन है, इनमें किसी दूसरे प्रयत्न या श्रम की आवश्यकता नहीं रहती, वैसे ही आत्मा के
चेतनअचेतन के विषय में भी जानना चाहिए