Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
चेतनाचेतनत्वोक्ती तस्येशत्वात्स्वदेहगे ।
उपदेशार्थमेवोक्ते न सद्विषयमर्थतः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
किया जाता है, वह तो मायाशबल होने से सर्वशक्ति सम्पन्न होने के कारण ब्रह्म के विषय में नहीं
है, किन्तु स्वदेहभूत माया के ही विषय में है यानी चेतनत्व अचेनत्व मायागत ही है । वह वचन केवल
उपदेश देने के लिए ही कहा जाता है, वह वस्तुतः परमार्थ विषयक नहीं है, ब्रह्म का कुछ भी स्पर्श
नहीं करता है