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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, Verse 14

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

इहैव नरकव्याधेश्चिकित्सां न करोति यः । गत्वा निरौषधं स्थानं सरुजः किं करिष्यति ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

परलोक की चिकित्सा परलोक में जाकर ही करेंगे, यहाँ पर उसकी चिन्ता करने से क्या फल 2 इस पर कहते हैं। जो पुरुष यहीं पर नरकरूप व्याधि की चिकित्सा नहीं करता, वह व्याधिग्रस्त पुरुष ओषधरहित नरक आदि प्रदेश में जाकर क्या चिकित्सा करेगा ?