Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
विचारयेत्तदुक्त्यर्थं बुद्ध्या बुद्धिविवृद्धये ।
सर्वसंकल्पमुक्तं यत्तत्सत्तन्मयतां व्रजेत् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
पण्डितो की उक्तियों के (वचनं के) अर्थो की
अपनी बुद्धि द्वारा श्रुति, युक्ति स्वानुभव एवं अन्य विद्वानों के अनुभवों को मिलाकर बुद्धि की
शुद्धि के लिए खूब बार-बार परीक्षा करनी चाहिए । अनन्तर समस्त संकल्पो से निर्मुक्त जो
वस्तु प्राप्त हो जाय, उसीका अवलम्बनकर तन्मय बन जाना चाहिए