Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 2
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, भले ही वह जगद्भ्रम उत्पन्न-सा हो जाय,
परन्तु उसमें ब्रह्मरूपता का ज्ञान यदि कर लिया जाय, तो किसी तरह से भी वह खेद का कारण
नहीं होता । यदि उसमें जगद्रूपता का ही ज्ञान कर लिया जाय, तो अवश्य ही वह महान् खेद का
कारण होगा