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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

जगत्संकल्पमात्रात्म तत्र तेऽर्थयुतं क्षणात् । शाम्यत्यशेषेणेत्येव निर्णयः सर्गविभ्रमे ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

ठीक हैं, आत्मतत्व के विषय में यह निर्णय एला ही रहे, किन्तु स्वर्गा आदि जयत्‌ के स्वरूप के विषय में क्रॉन-सा सफल निर्णय हुआ है ? उसे कहते हैं / हे श्रीरामजी, पूर्वोक्त स्थिति में सांसारिक पुरुषार्थाभासयुक्त आपका एकमात्र संकल्पस्वरूप यह जगत्‌ एक क्षण में ही पूर्णतः नष्ट हो जाय, बस इतना ही इस सृष्टि के विलास में सफल निर्णय हुआ है