Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
परिपूर्णार्णवप्रख्या काप्यपूर्वैव पूर्णता ।
तज्ज्ञानां द्रष्टृदृश्यांशदृष्टौ न हि पतन्ति ते ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीलिए तो तत््वज्ञानी पुरुष-स्रादा ही अद्वितीय चिदानन्द से परिपूर्ण रहते हैं यह कहते हैं ।
परिपूर्ण समुद्र के समान तत्त्वज्ञानियों में कोई अपूर्व ही अद्वितीय चिदानन्द की परिपूर्णता
रहती है, क्योकि वे द्रष्टा और दृश्यांश की दृष्टि में गिरते नहीं