Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 30, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 30, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
चित्रसंगरयुद्धस्य सैन्यस्याक्षुब्धता यथा ।
तथैव समता ज्ञस्य व्यवहारवतोपि च ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे चित्रलिखित युद्ध
में परस्पर प्रहार कर रही भी सेनाएँ क्षुब्ध-सी प्रतीत होने पर भी अक्षुब्ध ही रहती है, वैसे ही
व्यवहार में निरत भी ज्ञानी पुरुष में समता (अक्षुब्धता) ही रहती है